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!! व्याकुलता !! - Contest

Posted On: 8 Feb, 2014 Others,कविता,Contest में

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क्रत्यों की कायरता थी वह!
हृद्याभिलेखों से जूझते
सत्य की व्यथा थी वह!
लाया ना जा सका जिसे अधरों पर
अंतर्मन की कथा थी वह!
जो रमी रही
अखिल अवशेषों में
नहीं सदैव होने वाली
प्रथा थी वह!
वही सँवरी थी
नित्य ही
जीवन के स्वप्निल आँचल में
अतुल जीवन की
सम्यक-सकल प्रतीक्षा थी वह!
निर्णीत
जो न हो सकी
निश्चय के इच्छित प्रणों में
बन व्याकुलता
तब से आज तक
मन में समूल… सर्वदा थी वह!



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ikshit के द्वारा
March 12, 2014

दीपक जी इस प्रतिक्रिया में देरी के लिए खेद है. आप कि प्रशंशा ने बड़ा समर्थन दिया है धन्यवाद – इच्छित

deepakbijnory के द्वारा
March 2, 2014

बड़ी गहराई और व्यापकता है आपकी कविता में इक्षित जी ://deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/02/19/पीड़ा-गर-घर-में-मेरे-मेहमान


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