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Chote - Chote Anubhav

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!! सत्यमेव जयते !! - सोच उनकी.. कहें इच्छित जी !

Posted On: 2 Mar, 2014 Others,social issues,कविता में

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सड़क पर चलते हुए
अगर जो कुत्ता कोई
जिस्म की चर्बी नोच खाए
तो क्या इससे
हमारी इज़्ज़त लुट जाती है?
हाँ!
ग़लती
ज़रूर हमारी कही जाती है…
पर शिकायत करने पर
मुनिसीपालिटी
कुत्ते को पकड़ कर ले जाती है
और
घर में कोई दमदार होने पर
कुत्ते को
या तो गोली मार दी जाती है
या फिर
पीट-पीट कर
कुत्ते की जान ले ली जाती है…!
जब मासूम जानवर पर
उसकी ग़लती के लिए
नियम-क़ानून लागू होते हैं
तो फिर
वहशी-हैवान इंसान को
उसकी जान-बूझ कर की गयी ग़लती की
तत्काल
जायज़ सज़ा क्यों नहीं?
क्यों उसे दोबारा मौका
दूसरे जिस्म को काटने का???



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 4, 2014

बहुत ही दमदार और धारदार प्रस्तुति ! इक्षित जी बधाई !!

    ikshit के द्वारा
    March 5, 2014

    Vijay Ji namashkaar aap ki pratikriya padh kar harsh hua. aur aap ki prashansha meri peeth par ek shabashi jaisi hai. Sadhanywaad! Ikshit!

jlsingh के द्वारा
March 2, 2014

हाल ही की घटना का जिक्र मैंने फेसबुक पर किया था – रांची के एक महिला, जिसके पांच साल की बची की इज्जत पड़ोस में रहनेवाले नौजवान ने लूट ली थी, ने उस युवक को रॉड से पीट पीट कर मार डाला. उसने तत्काल सजा दे दी. काफी लोगों ने महिला की इस बहादुरी की तारीफ की थी. mere खुद की पुरानी पोस्ट की कुछ पंक्तियाँ-हो नहीं सकता भला इस दानवी संसार में, छोड़ ये मोमबत्तियां कटार लो अब हाथ में! अम्ल की लो बोतलें, डालो रिपु के अंग पर! पावडर मिर्ची की झोंको, नयन में उसे अंध कर! आत्म रक्षा आप कर लो, रोकता अब कौन है? कुछ नहीं बिगड़ेगा तेरा, क़ानून खुद मौन है! कुछ नहीं बिगड़ेगा तेरा, क़ानून खुद मौन है! सादर!

    ikshit के द्वारा
    March 5, 2014

    Shreeman namashkaar aap ki prashansha meri peeth par ek shabashi jaisi hai. Aur aap ki khud ki shaabdik pratikriya atulneey hai. Sadhanywaad! Ikshit!

deepakbijnory के द्वारा
March 2, 2014

क्योंकि कुत्ते को बचने हेतु कोई कुत्ता अधिकार संगठन नहीं है मगर इंसानी वहशियों को बचाने हेतु मानवाधिकार, क़ानून जैसे बुद्धिजीवी संगठन हैं आपका ब्लॉग पसंद आया अब तक ये छिपा रह गया http://deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/01/31/गूँगी-चीख-कविता/

    ikshit के द्वारा
    March 5, 2014

    Sir jee aap ki pratikriya jaan kar aisa laga ki khud ko dhany kaha ja sakta hai. aap ki prashansha meri peeth par ek badi shabashi jaisi hai. Aur aap ki khud ki shaabdik pratikriya atulneey hai. Sadhanywaad! Ikshit!


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